30 मई, 2012


कल रात कोई 
वो सभी इलज़ाम बहोत ख़ूबसूरत लगे -
जो उसने लगाये थे मुझ पर, यूँ 
भी ज़िन्दगी में इनामों की 
कमी न थी, इक और 
नायाब नगीना 
जड़ गया 
कोई,
दाग़े दिल लिए फिरता हूँ मैं उसकी गली 
में अकसर, बदहवास सा कुछ  कुछ, 
सुना है ; टूटे दहलीज़ पर कल
शब, भीगा  गुलाब
रख गया
कोई, 
- शांतनु सान्याल  
Paintings by Maria Serafina

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